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बड़ी खबर :राम मंदिर का भूमि पूजन आगामी 5 अगस्त को पीएम करेंगे।  भूमि पूजन पीएम के बजाय राष्ट्र्पति द्वारा कराये जाने आखिर किसने की वकालत ? जाने 

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* अयोध्या में बनने वाली मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के मन्दिर का भूमिपूजन भारत के प्रथम नागरिक महामहिम राष्ट्रपति जी के हाथों किया जाए  – कुँवर दुर्गेश प्रताप सिंह 

( ब्यूरो ,न्यूज़ 1 हिन्दुस्तान )

हरिद्वार। एक लंबे अंतराल के बाद सर्वोच्च न्यायालय से हिन्दू समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए न्यायसंगत फैसला आता है जिसमें अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि न्यास को उचित मानते हुए मर्यादा पुरूषोत्तम प्रभु श्रीराम की भव्य मन्दिर बनवाने की बात कही गई । इस न्यायसंगत फैसले से सभी के मन में एक बार फिर से न्यायपालिका के प्रति विश्वास को बल मिला। आपको बता दे कि कुँवर दुर्गेश प्रताप सिंह भाजपा के वरिष्ठ नेता है और पूर्व में सपा के प्रदेश पदाधिकारी रह चुके है। इतना ही नहीं स्वर्गीय प्रधानमन्त्री चंद्र शेखर सिंह के कभी बड़े ही करीबी रहे है। जो की आप उनकी फेसवाल पर देख भी सकते है कलयोकि उनके द्वारा समय पर स्व 0 चंद्रशेखर जी के साथ की तामाम् तस्वीरें पोस्ट करते रहते।  


 कुंवर दुर्गेश प्रटप ने कहा कि चूंकि मर्यादा पुरूषोत्तम प्रभु श्रीराम समस्त हिन्दू समाज के आदर्श हैं और आस्था के प्रतीक भी । इस फैसले के पश्चात तमाम कानूनी , आध्यात्मिक और व्यवहारिक प्रक्रियाओं को पूरा करने की जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास की अध्यक्षता में अंततः यह निर्णय लिया कि दिनाँक 3 अगस्त या 5 अगस्त को पांच गुम्बदों वाला 161 फीट ऊँचे प्रभु श्रीराम की मन्दिर के निर्माण का कार्य विधिवत आध्यात्मिक परम्पराओं के अनुरूप भूमि पूजन का कार्य किया जाएगा । इस नेक व पवित्र कार्य के लिए उक्त ट्रस्ट के समस्त पदाधिकारी गणों को साधुवाद व हृदय से आभार ।
 मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम समस्त हिन्दुओं के आदर्श थे , आदर्श हैं और सदैव रहेंगे । मेरा ऐसा विचार है कि एक लंबे समय से प्रभु श्रीरामजन्मभूमि को लेकर  राजनीति होती रही अथवा यह कहा जाए कि भारतीय राजनीति के केन्द्र बिन्दु में श्रीरामजन्मभूमि रही । इसकी शुरुआत कब और कहाँ से हुई अब मैं उन पहलुओं पर चर्चा करना नहीं चाहता परन्तु यह भी उतना ही सत्य है कि उस राजनीति की या उक्त श्रीराम जन्मभूमि के संघर्षों की एक मजबूत कड़ी वर्तमान की केंद्र सरकार में विराजमान भारतीय जनता पार्टी भी रही । अब जबकि एक सम्मानजनक फैसला आ चुका है और सही दिशा में इस पवित्र कार्य का शुभारंभ होने जा रहा है तो अब भविष्य में मर्यादा पुरूषोत्तम प्रभु श्रीराम पुनः भारतीय राजनीति के केंद्रबिंदु में स्थापित ना हों इसका मजबूती से प्रयास होना चाहिए ।
उस प्रयास की कड़ी में भारत का नागरिक होने के नाते भी और हिन्दू परिवार का सदस्य होने के कारण भी मेरा ऐसा मानना है और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सम्मानित सदस्यों से विनम्रतापूर्वक यह निवेदन है कि इस पुनित कार्य का राजनीतिकरण न हो और प्रभु श्रीराम की मर्यादा और समस्त हिंदू समाज की आस्था का सम्मान करते हुए ऐसा कोई कार्य न किया जाये जिससे पूरी आस्था को परेशान होना पड़े । दुर्गेश प्रताप सिंह ने क्या कहा ,यहाँ कम शब्दों में प्रकाशित है। परन्तु आप इस विषय पर उनको पूरा सुन सकते है ,निचे। 


भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी निश्चित रूप से योग्यवान हैं परन्तु वो भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ सदस्य भी हैं और यदि उनके द्वारा उक्त भव्य मन्दिर का शिलान्यास होता है तो मुझे व्यक्तिगत कोई परेशानी नहीं है परन्तु इस पुनित कार्य का राजनीतिकरण होना सुनिश्चित है जो कहीं से शुभ संकेत नहीं होगा ।
ऐसे में मेरा ऐसा मत है कि सभी पूज्य संतों , अखाड़ा परिषद के समस्त श्रद्धेय सदस्यों , पूज्य आचार्य महामंडलेश्वरों व पूज्य महामंडलेश्वरों , भारत के प्रधानमंत्री की पावन उपस्थिति में मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की भव्य मंदिर का भूमिपूजन भारत के प्रथम नागरिक राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के करकमलों  द्वारा संम्पन्न कराया जाए । जिससे श्रीराम मंदिर का राजनीतिकरण भी नहीं होगा और प्रभु श्रीराम की मर्यादा की रक्षा भी सुनिश्चित हो जाएगी ।

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