( ब्यूरो ,न्यूज़ 1 हिन्दुस्तान )
नई दिल्ली। करीब दो साल बाद आज 15 मई की अल – सुबह से पेट्रोल-डीजल 3-3 रुपए महंगा हो गया है। अगर आपको लगता है कि ये कीमतें यहीं ठहरने वाली हैं, तो रुकिए, असली ‘गणित’ वो है, जो इशारा कर रहा है कि आने वाले दिनों में आपकी जेब और ढीली हो सकती है। आइये पहले समझते है बढ़ी हुई कीमत को फिर समझेंगे ‘ब्रेक-ईवन’ का गणित और PM मोदी की गणित को।

पेट्रोल-डीजल और CNG का नया रेट
दिल्ली से लेकर मुंबई तक, तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अब आपके बजट पर दिख सकता है। दिल्ली में पेट्रोल अब ₹97.77 और डीजल ₹90.67 लीटर हो गया है। मुंबई में पेट्रोल ने ₹106 का आंकड़ा पार कर लिया है। CNG भी 2 रुपए प्रति किलो महंगी हो गई है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतें क्यों बढ़ीं?
इसकी मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (crude oil) की कीमतें है। कुछ समय पहले तक क्रूड ऑयल करीब 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, लेकिन अब यह 100 डॉलर से ऊपर पहुंच गया है। जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो भारत जैसी आयात करने वाली अर्थव्यवस्था पर सीधा दबाव पड़ता है। तेल कंपनियां फिर या तो घाटा सहती हैं या कीमतें एडजस्ट करती हैं।

पेट्रोल कंपनियों के ‘ब्रेक-ईवन’ का गणित क्या है?
ब्रेक-ईवन का सीधा मतलब है ना फायदा, ना नुकसान। सरकारी तेल कंपनियां जैसे IOCL, BPCL और HPCL अभी तक कई मामलों में घाटे में ईंधन बेच रही थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनियों को हर महीने हर महीने करीब 30,000 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है, क्योंकि वे पुरानी कीमतों पर फ्यूल बेच रही थीं, जबकि कच्चा तेल महंगा हो चुका था। अब जो ₹3 की बढ़ोतरी हुई है, उसे एक्सपर्ट्स पूरा सुधार नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि असली बैलेंस तक पहुंचने के लिए अभी भी कीमतों में और एडजस्टमेंट की जरूरत हो सकती है।
पेट्रोल-डीजल और कितना महंगा हो सकता है?
एक्सपर्ट्स की मानें तो तेल कंपनियों के लिए यह 3 रुपए ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ जैसा है। कंपनियां ‘नो प्रॉफिट-नो लॉस’ (Break-Even) पर तब आएंगी, जब पेट्रोल के दाम में करीब 28 रुपए और डीजल में 32 रुपए की और बढ़ोतरी हो। अगर हालात नहीं सुधरे, तो वो दिन दूर नहीं जब पेट्रोल का रेट ₹120 से ₹125 के बीच नजर आए।

पेट्रोल-डीजल की कीमतें क्यों रुकी हुई थीं?
मार्च 2024 के बाद से तेल के दाम स्थिर थे। 5 राज्यों के चुनाव से ठीक पहले जनता को 2 रुपए की राहत भी दी गई थी। जानकारों का कहना है कि ‘राजनीतिक संवेदनशीलता’ की वजह से कंपनियां घाटा सहकर भी दाम नहीं बढ़ा रही थीं, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय दबाव इतना ज्यादा है कि कीमतें बढ़ाना मजबूरी बन गया है।

PM मोदी का ‘सावधान’ रहने वाला इशारा
हाल ही में पीएम मोदी ने तेलंगाना के एक प्रोग्राम में एक बहुत पते की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि आज के हालात को देखते हुए हमें पेट्रोल-डीजल और गैस का इस्तेमाल ‘बहुत संयम’ से करना चाहिए। उनका यह इशारा शायद आज की इसी महंगाई की ओर था। जितना कम हम विदेशी तेल पर निर्भर रहेंगे, उतना ही देश की इकोनॉमी और आपकी जेब सुरक्षित रहेगी।



