( ब्यूरो ,न्यूज़ 1 हिन्दुस्तान )
नई दिल्ली। केंद्र सरकार के ताजा आंकड़ों ने देश को हिलाकर रख दिया। वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में व्यक्तिगत आयकर (इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स) से 14.2 लाख करोड़ रुपये की वसूली हुई, जो कॉर्पोरेट टैक्स (13.9 लाख करोड़) से अधिक है। सैलरीड क्लास, छोटे व्यापारी और प्रोफेशनल्स ने कंधों पर पूरा बोझ लाद लिया। ये पहली दफा है जब ‘आम आदमी’ ने बड़ी कंपनियों को पछाड़ दिया। लेकिन इनाम? महंगाई 6.8% पर आसमान छू रही, टैक्स स्लैब में कोई राहत नहीं!
मिडिल क्लास (10-50 लाख सालाना आय) देश की 30% आबादी है, लेकिन डायरेक्ट टैक्स का 60% हिस्सा यही देते हैं। न्यू टैक्स रिजीम में 12 लाख से ऊपर 30% स्लैब, पुरानी में डिडक्शन कटौती का जाल। ऊपर से GST 18-28%, पेट्रोल-डीजल पर 50% टैक्स। जनवरी 2026 में CPI 6.8%, खाने-पीने की चीजें 8.2% महंगी। सब्जियां 15% ऊपर, दूध-फल 10%। घर लोन EMI, बच्चों की फीस, मेडिकल बिल – मिडिल क्लास डूब रहा है। कंपनियां? 22% फ्लैट रेट, MAT छूट, टैक्स हेवन से बच निकलतीं।
क्यों बन गया मिडिल क्लास ‘टैक्स मशीन’?
ईमानदारी ही सबसे बड़ा गुनाह। 9 करोड़ सैलरीड टैक्सपेयर्स PAN से ट्रैक, TDS ऑटो कट। कंपनियां ट्रांसफर प्राइसिंग, लीगल।





