* संसद में बजट पेश होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल कर सकते।
* पुराने दिग्गजों की विदाई और नए चेहरों की एंट्री के इस खेल ने विपक्ष के साथ-साथ खुद पार्टी के भीतर भी सस्पेंस बढ़ा दिया।
( सुनील तनेजा / ज्ञान प्रकाश पाण्डेय )
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के सियासी गलियारों में इन दिनों हलचल तेज है। साल 2026 की शुरुआत के साथ ही केंद्र की एनडीए (NDA) सरकार एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है।
खबर है कि संसद में बजट पेश होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल कर सकते हैं। यह बदलाव सिर्फ मंत्रियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के संगठन में भी एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। बीजेपी ने युवा नेता नितिन नवीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर पहले ही ‘जेनरेशन शिफ्ट’ का बड़ा संदेश दे दिया है, और अब माना जा रहा है कि यही झलक आने वाले कैबिनेट विस्तार में भी दिखाई देगी। पुराने दिग्गजों की विदाई और नए चेहरों की एंट्री के इस खेल ने विपक्ष के साथ-साथ खुद पार्टी के भीतर भी सस्पेंस बढ़ा दिया है।
नितिन नवीन की नई टीम और संगठन का पुनर्गठन
इसी महीने बीजेपी को नितिन नवीन के रूप में अपना नया पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल सकता है। सूत्रों की मानें तो अध्यक्ष पद के चुनाव के ठीक बाद अगले महीने बीजेपी की नेशनल काउंसिल की बड़ी बैठक होने वाली है। इस बैठक में न केवल नितिन नवीन के नाम पर मुहर लगेगी, बल्कि बीजेपी की पूरी ‘राष्ट्रीय टीम’ का ढांचा भी बदल जाएगा। चर्चा है कि नवीन की टीम में अनुभव के साथ-साथ भारी संख्या में युवा जोश को जगह दी जाएगी। यह पुनर्गठन आगामी विधानसभा चुनावों और भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। पार्टी के भीतर यह चर्चा आम है कि जो नेता पिछले कई सालों से संगठन के अहम पदों पर जमे हुए थे, उनमें से कई को अब चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है या मार्गदर्शक की भूमिका दी जा सकती है।
छह मंत्रियों की छुट्टी और यूपी से ब्राह्मण चेहरे की एंट्री?
इस फेरबदल की सबसे बड़ी वजह राज्यसभा का समीकरण भी है। इस साल एनडीए सरकार के छह मंत्रियों का राज्यसभा कार्यकाल पूरा हो रहा है, जिनमें से चार का कार्यकाल अप्रैल से जून के बीच खत्म हो जाएगा। माना जा रहा है कि इनमें से अधिकांश मंत्रियों की जगह नए चेहरों को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिहाज से भी यह विस्तार बेहद अहम है। पिछले दिनों यूपी में ब्राह्मण विधायकों की एक गोपनीय बैठक के बाद काफी हंगामा मचा था, जिसे देखते हुए हाईकमान अब डैमेज कंट्रोल की तैयारी में है। सुगबुगाहट है कि यूपी से एक कद्दावर ब्राह्मण नेता, जो राज्यसभा में अपनी वाकपटुता के लिए जाने जाते हैं, उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है। यह कदम 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले जातिगत समीकरणों को साधने की एक बड़ी कोशिश मानी जा रही है।
सहयोगी दलों का बढ़ेगा कद
कैबिनेट विस्तार में सिर्फ बीजेपी ही नहीं, बल्कि सहयोगी दलों को भी खुश करने की तैयारी है। बिहार में नीतीश कुमार की जेडीयू (JDU) कोटे से एक और मंत्री बनाए जाने की प्रबल संभावना है। वहीं, सबसे ज्यादा नजरें महाराष्ट्र की एनसीपी (अजित पवार गुट) पर टिकी हैं। कहा जा रहा है कि एनसीपी के एक दिग्गज नेता को सीधे कैबिनेट मंत्री का पद दिया जा सकता है। यह वही नेता हैं जिन्हें पहले ‘स्वतंत्र प्रभार’ (Independent Charge) का ऑफर दिया गया था, लेकिन उन्होंने इसे छोटा पद मानकर लेने से इनकार कर दिया था। अब आगामी निकाय चुनावों और महाराष्ट्र की राजनीति को देखते हुए उन्हें बड़ा पोर्टफोलियो मिलना लगभग तय माना जा रहा है।




