कुंभ के आयोजन के लिए गंगा किनारे पहली बार बैठक की गई।
*2027 कुंभ स्नान की महत्वपूर्ण तिथियों की मुख्यमंत्री ने घोषणा की।
*संस्कृति के संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा उठाए गए कदमों की संतजनों ने की सराहना ।
( ज्ञान प्रकाश पाण्डेय )
हरिद्वार। अखाड़ों में चल रही मतभेद के बीच होने वाली बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में शुक्रवार को धर्मनगरी हरिद्वार में अर्धकुंभ को भव्य और दिव्य बनाने का खाका तैयार किया गया। 97 दिन के आयोजन में 10 स्नान होंगे। अखाड़ों के आचार्यों, प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर सीएम ने अर्धकुंभ स्नान की तिथियां घोषित कीं। आगाज 14 जनवरी को मकर संक्रांति के साथ होगा और 20 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा के शाही स्नान के साथ समापन होगा।




अखाड़ों में चल रही मतभेद के बीच शुक्रवार को सुबह करीब 11.30 बजे डामकोठी में संतों के साथ सीएम पुष्कर सिंह धामी ने बैठक की। 12 अखाड़ों के आचार्यों, प्रतिनिधियों ने शिरकत की, साथ ही अर्धकुंभ की तैयारियों पर मंथन किया गया। करीब एक घंटे तक चली बैठक में न सिर्फ तिथियों की घोषणा की गई, बल्कि अखाड़ों के संतों का सम्मान करते हुए उनमें व्याप्त असंतोष को भी दूर किया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री की उपस्थिति में अखाड़ों के संतों-महंतों ने कुंभ को दिव्य और भव्य बनाने का संकल्प लिया। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने भी अखाड़ों के संतों की चिंताओं का समाधान कर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया।
मुख्यमंत्री ने सुझाव मांगे और संतों की राय के अनुसार अर्धकुंभ की तैयारियों को आगे बढ़ाने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि सभी निर्णयों में संत परंपराओं, आवश्यकताओं और सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
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सौभाग्य से अर्धकुंभ के सुव्यवस्थित एवं भव्य आयोजन के लिए संतों का आशीर्वाद और मार्गदर्शन मिल रहा है, अन्यथा इस महायोजना की पूर्णता की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देवभूमि को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने का आह्वान किया है। सरकार इसी संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है।-पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड
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“मुख्यमंत्री के साथ बैठक में अखाड़ों के आपसी मतभेद समाप्त हो गए हैं। सभी अखाड़े सरकार के साथ हैं और अब कुंभ मेले की भव्य तैयारी करेंगे और तय तिथियों पर अमृत स्नान करेंगे। कुंभ की तरह हरिद्वार में धर्मध्वजा स्थापित की जाएंगी और अखाड़ों की छावनियां लगेंगी। अब अर्धकुंभ को पूर्णकुंभ नहीं, महाकुंभ की तरह आयोजित किया जाएगा।
-श्रीमहंत रविंद्र पुरी, अध्यक्ष, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद




हरिद्वार कुंभ में स्नान की तिथियां
1. मकर संक्रांति (14 जनवरी)
2. माैनी अमावस्या (06 फरवरी)
3. वसंत पंचमी (11 फरवरी)
4. माघ पूर्णिमा (20 फरवरी)
5. महाशिवरात्रि (06 मार्च)
6. फाल्गुन अमावस्या (08 मार्च)
7. नव संवत्सर (07 अप्रैल)
8. मेष संक्रांति (14 अप्रैल)
9. श्री रामनवमी (15 अप्रैल)
10. चैत्र पूर्णिमा (20 अप्रैल)




