( ब्यूरो ,न्यूज़ 1 हिन्दुस्तान )
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में बड़ा संदेश देने वाली कार्रवाई सामने आई है। अपनी ही सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर खुले तौर पर सवाल उठाने वाले विधायक अरविंद पांडे को पार्टी ने अब किनारे कर दिया है। यह कदम सिर्फ एक विधायक तक सीमित नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर असहमति की आवाज़ों पर लगाम के तौर पर देखा जा रहा है। “सवाल पूछना लोकतंत्र की ताकत माना जाता है, लेकिन उत्तराखंड में सवाल पूछने की कीमत चुकानी पड़ रही है। अपनी ही सरकार से जवाब मांगने वाले विधायक अरविंद पांडे को पार्टी ने साइडलाइन कर दिया है। अब बड़ा सवाल ये है क्या पार्टी के भीतर सच बोलने की कोई जगह बची है? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम आने वाले समय में पार्टी की आंतरिक राजनीति को प्रभावित कर सकता है।
तीन सबसे बड़े और अहम सवाल?
1- क्या वे सिद्धांतों पर अडिग रहेंगे?
2- या राजनीतिक भविष्य को प्राथमिकता देंगे?
3- क्या यह मामला अन्य असंतुष्ट विधायकों को भी आवाज़ देगा?
अब देखना यह होगा कि अरविंद पांडे का अगला कदम सिर्फ उनका नहीं, बल्कि यह तय करेगा कि उत्तराखंड की राजनीति में असहमति का भविष्य क्या होगा?







