( ब्यूरो, न्यूज़ 1 हिन्दुस्तान )
देहरादून। उधम सिंह नगर के एसएसपी मणिकांत मिश्रा का ना तो ट्रांसफर किया गया है ना ही उन्हें सस्पेंड किया गया है,जबकि काशीपुर के किसान सुखवंत ने काठगोदाम,हल्द्वानी में खुद को गोली मारने से पहले उधमसिंह नगर पुलिस के एसएसपी मणिकांत मिश्रा समेत अन्य कई पुलिस कर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए थे।निष्पक्ष जांच के लिए 12 पुलिसकर्मियों को चमोली व रुद्रप्रयाग जिलों में स्थानांतरित किया गया। आईटीआई थाना प्रभारी कुंदन सिंह रौतेला सहित 3 को निलंबित और 9 को लाइन हाजिर किया गया।लेकिन इस मामले में सबसे बड़े अधिकारी एसएसपी मणिकांत मिश्रा को ना तो सस्पेंड किया गया है ना ही उनका ट्रांसफर किया गया है।क्या इतने बड़े अधिकारी के अपने पद पर बने रहते हुए निष्पक्ष जांच की जा सकती है?आखिरकार इस बड़े अधिकारी पर किसका हाथ है जो इतने गंभीर आरोप लगने के बाद भी ना तो उनका ट्रांसफर हुआ नहीं उन्हें सस्पेंड किया गया?जबकि मृतक सुखवंत ने मौत से पहले अपने अंतिम वीडियो में कहा था कि मेरे मरने के बाद मेरे अंग बेचकर वह पैसा एसएसपी मणिकांत मिश्रा समेत अन्य पुलिस कर्मियों को दे देना। इस मामले में कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत एसपी से डेढ़ घंटे की पूछताछ कर चुके हैं और अब एसआईटी भी मणिकांत मिश्रा से पूछताछ करने वाली है।शायद एसएसपी मणिकांत मिश्र के लिये कोई नियम कानून है और न भारतीय न्याय संहिता(बीएनएस) की धाराएं।






