( सुनील तनेजा )
प्रयागराज। मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक और नोटिस भेजा है। अब अविमुक्तेश्वरानंद से पूछा गया है कि आपकी मेले में एंट्री को हमेशा के लिए बैन क्यों ना किया जाए? आपको बता दे कि प्रयागराज मेला प्राधिकरण अविमुक्तेश्वरानंद को अपने नाम के आगे शंकराचार्य लगाने को लेकर एक नोटिस पहले ही भेज चुका है।
प्रयागराज में प्रशासन और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच हुआ विवाद अब और तूल पकड़ते जा रहा है। अब प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक और नोटिस भेजा है। मेला प्राधिकरण ने नोटिस में कहा कि आपकी वजह से मेले की व्यवस्था खराब हुई. लोगों की सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हुआ। इसलिए स्पष्ट करें कि मेला क्षेत्र में आपको दी गई जमीन को निरस्त कर, आपको हमेशा के लिए मेले में घुसने पर प्रतिबंध क्यों न लगाया जाए? नोटिस में फिर से कहा गया है कि आप अपने शिविर के बाहर शंकराचार्य का बोर्ड लगा रहे हैं, जो कि कोर्ट की अवमानना है।
अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला प्राधिकरण की पहली नोटिस का दिया जवाब
इससे पहले भी मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस भेजकर पूछा था कि वह अपने नाम के आगे शंकराचार्य कैसे लगा रहे हैं, जब मामला कोर्ट में विचाराधीन है। अविमुक्तेश्वरानंद ने 24 घंटे में मेला प्रशासन को 8 पेजों का जवाब ई-मेल के जरिए भेजा है। उन्होंने नोटिस को मनमाना, दुर्भावनापूर्ण और असंवैधानिक बताया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से ऐसा कोई आदेश नहीं आया है कि जिससे अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य पद पर बने रहने से रोका जाए।
अविमुक्तेश्वरानंद का प्रयागराज मेला प्राधिकरण को चेतावनी
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आगे कहा था कि शंकराचार्य को लेकर जो विवाद वाला मामला कोर्ट में है। इसपर किसी तीसरे पक्ष को टिप्पणी करने और रोक लगाने का अधिकार नहीं है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज मेला प्राधिकरण को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उन्होंने नोटिस को वापस नहीं लिया तो कोर्ट में मानहानि का दावा करेंगे।
क्या है पूरा मामला?
मौनी अमावस्या यानी 19 जनवरी के दिन को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोका. फिर भीड़ का हवाला देते हुए पैदल जाने को कहा इसके बाद पुलिस की अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की हुई। शिष्यों से मारपीट और पालकी रोके जाने से नाराज अविमुक्तेश्वरानंद फिर धरने पर बैठ गए।






