( ब्यूरो ,न्यूज़ 1 हिन्दुस्तान )
नई दिल्ली। 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में CJI की बेंच एक वकील की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा था कि कुछ बेरोजगार युवा कॉकरोच जैसे होते हैं, जो बाद में मीडिया, सोशल मीडिया या RTI एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमला करने लगते हैं।
CJI की ‘कॉकरोच’ संबंधी टिप्पणी को अभिजीत दीपके ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ में बदल दिया, यह पहले एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया पेज के तौर पर शुरू हुई, सोशल मीडिया पर कॉकरोच इमोजी की बाढ़ आ गई, रातों-रात मीम्स बनने लगे, कलाकारों ने कार्टून बनाए और कैंपस में व्यंग्यात्मक पोस्टर घूमने लगे।
पूरा मामला पढ़िए
मई में CJI सूर्यकांत की ‘कॉकरोच’ संबंधी टिप्पणी वायरल हुई। इसके बाद अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘अगर कॉकरोच कहे जा रहे युवा एकजुट हो जाएं तो क्या होगा?’ कुछ दिनों में उसके इंस्टाग्राम पर 2.1 करोड़ फॉलोअर हो गए।
सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी, नीट पेपर लीक से गुस्सा और सोशल मीडिया पर शुरू हुई व्यंग्यात्मक मुहिम, इन तीनों ने अभिजीत दीपके के नेतृत्व में इतना बड़ा जन-आंदोलन खड़ा किया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से इस्तीफा देना पड़ा।
नीट पेपर लीक को बनाया मुद्दा
नीट पेपर लीक का मुद्दा बनाकर दीपके की सीजेपी ने सड़क पर उतरने का एलना किया। इस दौरान कॉकरोच शब्द को आंदोलन का पहचान बनाया। इसके बाद अभिजीत दीपके ने 20 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू तक दिया। इस धरना प्रदर्शन ने ऐसा उग्र रूप लिया कि 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया।
कब क्या क्या हुआ?
3 मई- नीट-यूजी का आयोजन हुआ, 22 लाख उम्मीदवार शामिल हुए।
12 मई – पेपर लीक के आरोपों के बाद नीट-यूजी को रद कर दिया गया।
24 जुलाई- केंद्र और सीजेपी के बीच दूसरे दौर की बातचीत हुई। प्रदर्शनकारियों ने प्रधान के इस्तीफे पर जोर दिया।
पार्टी से इस्तीफे तक… 10 तारीखें
15 मई – कोर्ट की टिप्पणी बनी ट्रिगर
16 मई – सोशल मीडिया पर बनी सीजेपी
4 जून – पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में आह्वान
6 जून – नई दिल्ली में सीजेपी के पहले प्रदर्शन का नेतृत्व करने के लिए दीपके भारत आए, जिसमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई।
20 जून – सीजेपी ने जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन शुरू किया।
28 जून – सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू की।
18 जुलाई – वांगचुक को हटाया गया
20 जुलाई – संसद मार्च, पहली वार्ता
24 जुलाई – 26 दिन बाद केंद्र से आश्वासन मिलने के बाद सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल खत्म की।
25 जुलाई – धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और आंदोलन की सबसे बड़ी जीत।





