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प्रवासियों की घर वापसी से राज्य आंदोलनकारी खुश, लेकिन सरकार के इंतजाम ठीक ना होने से है भारी निराशा। आखिर क्यों ? जाने 

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 ( ब्यूरो ,न्यूज़ 1 हिन्दुस्तान )

देहरादून। चिन्हित राज्य आंदोलनकारी समिति के झंडे तले आज दूसरी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जन मन की बात का आयोजन किया गया। कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर इंदिरा ह्रदयेश ने इस बात पर खुशी जाहिर की कि राज्य का बढ़ता पलायन जहां रुका है व जहां लोग लौट कर वापस आये हैं वहीं उनकी रहने खाने और इलाज की व्यवस्था ठीक ना होने पर वे राज्य सरकार पर बरस पड़ी। उनका कहना था कि राज्य सरकार विपक्षी दल की किसी भी राय पर काम करने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष का अपना महत्वपूर्ण रोल होता है और समय-समय पर जो विपक्ष राय देता है सरकार अगर उस पर चिंतन मनन नहीं करती इससे नुकसान जनता का और समाज का होता है। उन्होंने  कोराना  से  टक्कर लेने के लिए सरकार से आग्रह किया कि वे इतनी भयंकर चुनौती को इतना आसान न समझे कि वह अकेले इससे निपट लेगी।  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जब इसे अकेले टक्कर नहीं ले पा रहे तो त्रिवेंद्र सिंह रावत के बूते की यह बात नहीं है।

डॉक्टर इंदिरा हृदयेश ने कहा कि उन्होंने पिछले दिनों में कई बार सरकार को सुझाव दिए हैं परंतु वे इस बात से निराश हैं एक भी सुझाव पर सरकार ने काम नहीं किया। जिसका नतीजा यह है कि अब कोरोना जमीन से चढ़कर ,मैदान से चढ़कर पहाड़ों के जिलों तक पहुंच गया है और उसकी दस्तक भारत से जुड़े नेपाल की सीमा से लेकर चीन की सीमा तक सुनने में आ रही है। उन्होंने कहा कि इस को रोका जा सकता था यदि सरकार इरादा करती और सबको मिलकर चलती परंतु सरकार ने हठधर्मिता के चलते  ऐसा करना उचित नहीं समझा ।उन्होंने इस बात पर जोर दिया अब जो प्रवासी आ रहे हैं उनका राज्य की सीमाओं पर ही ठीक से परीक्षण होना चाहिए और उस व्यवस्था के बाद ही राज्य के अन्य कार्य होने चाहिए। डॉ ह्रदयेश  ने मसूरी के आंदोलनकारी राजेंद्र पवार के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने सीने पर गोली खाई थी और तब उत्तराखंड राज्य बना था। इस गोष्ठी को संबोधित करते हुए पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने बीमारी के नाम पर निर्दोष ग्रामीणों और प्रवासियों पर मुकदमे बनाए जाने पर गहरी नाराजगी का इजहार किया और कहा कि लोग पहले ही कोरोना के भय से पीड़ित है ।अब यदि उन पर बीमारी भी निकल जाती है तो उनको मुकदमों से दबाना किसी भी दृष्टि से क्षम्य नहीं है। उन्होंने जल जंगल जमीन के अधिकारों के सवाल को उठाया।

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 इस पोस्ट को पढ़ने के लिए क्लिक करे = Big Breaking : शनिवार सुबह उत्तराखण्ड में मिले 20 कोरोना मरीज। संख्या 173 हुई। आखिर किस जिले में बढे ? जाने  
http://news1hindustan.com/big-breaking-20-corona-patients-found-in-uttarakhand-on-saturday-morning-the-number-was-173/

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समिति के अध्यक्ष हरिकिशन भट्ट ने राज्य आंदोलनकारियों की ओर से मुख्यमंत्री को पूर्ण सहयोग की पेशकश करते हुए कहा कि उत्तरकाशी के आंदोलनकारियों ने 778000 देकर सरकार की सहायता की है और हम आगे भी हर तरह की सहायता को तैयार है। इस गोष्ठी को संबोधित करते हुए समिति के संरक्षक जयप्रकाश उत्तराखंडी पूर्व राज्य मंत्री हरीश पनेरु नवल शर्मा मनमोहन शाह अरुणा थपलियाल अनिल जोशी रामेश्वर कुकरेती डॉ विजेंद्र पोखरियाल बाल गोविंद डोभाल सावित्री नेगी डॉक्टर अमर सिंह अहतान  कमला पांडे भास्कर चंद्र उत्तराखंड क्रांति दल के नेता सलीम अहमद, नवीन मुरारी उत्तराखंड कांग्रेस के उपाध्यक्ष एसपी सिंह इंजीनियर, सावित्री नेगी समेत तमाम वक्ताओं ने राज्य सरकार पर कोरोना की चुनौतियों से लड़ने में पूर्ण विफलता का आरोप लगाया। गोष्ठी की समाप्ति के बाद धीरेंद्र प्रताप के प्रस्ताव पर मसूरी के प्रसिद्ध आंदोलन कारी राजेंद्र पंवार की स्मृति में 2 मिनट का मौन रखा गया और उनके निधन को राज्य के लिए एक दुखद दिन और बड़ी क्षति बताया गया।  

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