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कोरोना पीड़ित आईएफएस की रिपोर्ट नेगेटिव,अभी भी अस्पताल से छुट्टी नहीं दी गई। आखिर क्यों ? जाने 

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*  यह हो सकता है कि मरीज को अस्पताल के दूसरे आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाए। लेकिन मरीज को अभी निगरानी में ही रखा जाएगा।

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(ब्यूरो ,न्यूज़ 1 हिन्दुस्तान )

देहरादून। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के ट्रेनी आईएफएस अफसर और राज्य के पहले कोरोना मरीज को दून अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने ठीक कर लिया है। आठ दिनों के इलाज के बाद मरीज की कोरोना सैम्पल रिपोर्ट नेगेटिव आई है। हालांकि मरीज को अभी अस्पताल से छुट्टी नहीं दी जा रही है। ट्रेनी आईएफएस का एक और सैम्पल जांच के लिए भेजा जा रहा है। उसके बाद ही मरीज की अस्पताल से छुट्टी के संदर्भ में निर्णय लिया जाएगा। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ अमिता उप्रेती ने बताया कि इलाज के बाद मरीज की सैम्पल रिपोर्ट जांच के हल्द्वानी लैब भेजी गई थी। जिसमे मरीज में कोरोना वायरस न होने की पुष्टि हो गयी है। हालांकि रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद भी मरीज को अस्पताल से छुट्टी नहीं दी जाएगी। मरीज का एक और सैम्पल जांच के लिए हल्द्वानी लैब भेज जा रहा है। उसकी रिपोर्ट के बाद ही मरीज को अस्पताल से छुट्टी देने पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि यह हो सकता है कि मरीज को अस्पताल के दूसरे आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाए। लेकिन मरीज को अभी निगरानी में ही रखा जाएगा। इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के ट्रेनी असफर को कोरोना संक्रमण से बाहर लाने वाले दून अस्पताल के डॉक्टरों की टीम सैम्पल रिपोर्ट से बेहद उत्साहित है।

दरअसल राज्य में कोरोना का यह पहला मरीज होने की वजह से डॉक्टरों के लिए भी इलाज एक बड़ी चुनौती बन गया था। कोरोना को लेकर पूरी दुनियां में दहशत का माहौल है। इसका डॉक्टरों पर भी असर है। मरीज का इलाज कर रहे चिकित्सकों के अनुसार मरीज को एंटी मलेरियल ड्रग कोलोरोक्वीन की डोज दी गयी। इसके अलावा अन्य दवाएं लक्षणों के आधार पर तय की गई। उन्होंने बताया कि वायरस का असर मरीज के श्वसन तंत्र को प्रभावित नहीं कर पाया। जिस वजह से मरीज के फेफड़ों में कोई संक्रमण नहीं था। तकरीबन एक सप्ताह से अस्पताल में मरीज का इलाज किया जा रहा है लेकिन कभी बुखार भी नहीं आया। हालांकि मरीज पर पूरी नजर रखी जा रही है और कई टैस्ट भी कराए गए। दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और इलाज कर रही टीम की अगुवाई कर रहे डॉ आशुतोष सायना का कहना है कि मरीज की इम्युनिटी का भी इसमें बड़ा रोल है। उन्होंने कहा कि मरीज में वायरस का ज्यादा लोड नहीं था। लेकिन यदि मरीज कोई बुजुर्ग होता या उसमें पहले से कोई दूसरी बीमारी होती तो संक्रमण का स्तर अधिक हो सकता था।

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