( ज्ञान प्रकाश पाण्डेय )
हरिद्वार। बुद्ध पूर्णिमा के पर्व पर हरिद्वार में हरकी पैड़ी, मालवीय द्वीप, सुभाष घाट, गौ घाट, रोडीबेलवाला घाट सहित, विभिन्न घाटों पर स्नान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े हैं।
सुबह पौ फटने से स्नान और पूजन का क्रम चल रहा है। हर-हर गंगे और मां गंगा के जयकारों के साथ श्रद्धालु गंगा की पवन सलिला में पुण्य की डुबकी लगा रहे हैं।
बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। हर की पौड़ी सहित गंगा घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।
हर हर गंगे के जयघोष से पूरा गंगा घाट क्षेत्र गूंज उठा, जिससे माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया।




एसएसपी हरिद्वार ने कहा
एसएसपी हरिद्वार नवनीत भुल्लर का कहना है कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। घाटों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है।

वहीं ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के जरिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। इसके साथ ही भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग और ट्रैफिक डायवर्जन की भी विशेष व्यवस्था लागू की गई है, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था ना हो।
क्या कहते है पंडित मनोज त्रिपाठी
हरिद्वार स्थित नारायणी शिला के मुख्य सेवक प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज त्रिपाठी के अनुसार हिंदू पंचांग के वैशाख मास की पूर्णिमा का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। इसे बुद्ध पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इसी पावन तिथि पर भगवान गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था। यह तिथि हिंदू धर्म के साथ-साथ बौद्ध धर्म में भी अत्यंत पवित्र मानी गई है।
उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में वैशाख पूर्णिमा तिथि को स्नान, दान और तप के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस तिथि पर अगर भगवान विष्णु की पूजा और जल का दान किया जाए, तो इससे अक्षय पुण्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।




दान का महत्व: ‘जल दान’ है सबसे बड़ा पुण्य
पंडित मनोज त्रिपाठी के अनुसार वैशाख के महीने में भीषण गर्मी होती है, इसलिए इस दिन जल सेवा को सबसे बड़ा धर्म माना गया है। राहगीरों को ठंडा पानी पिलाना, प्याऊ लगवाना या किसी प्यासे जानवर के लिए पानी की व्यवस्था करना अनंत पुण्य देता है। इसके अलावा जरूरतमंदों को पंखा, मिट्टी का घड़ा या सत्तू दान करना भी उत्तम फलदायी होता है।



