( ज्ञान प्रकाश पाण्डेय )
हरिद्वार। इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा। नारायणी शिला मंदिर ( प्रेत शिला ) के मुख्य सेवक ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज त्रिपाठी के अनुसार करीब 27 वर्षों बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा और एक साथ पांच शुभ योगों का निर्माण होगा। इससे यह पर्व धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत विशेष माना जा रहा है।
ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज त्रिपाठी के अनुसार इस बार रक्षाबंधन पर सुकर्मा योग, बुधादित्य योग, उभयचरी योग, सर्वार्थ सिद्धि योग तथा त्रिपुष्कर योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। वहीं भद्रा काल नहीं होने के कारण पूरे दिन रक्षा सूत्र बांधने में कोई बाधा नहीं रहेगी। धार्मिक मान्यताओं में भद्रा काल में रक्षाबंधन करना शुभ नहीं माना जाता है।
श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को मनाया जाने वाला रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का प्रतीक है। साथ ही यह गुरु-शिष्य परंपरा से भी जुड़ा हुआ पर्व है। इस दिन बहनें भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, जबकि गुरु अपने शिष्यों और पुरोहित अपने यजमानों को रक्षा सूत्र बांधकर आशीर्वाद देते हैं।

ये रहेगा शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज त्रिपाठी के अनुसार पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह लगभग 9:45 बजे तक शुभ मुहूर्त रहेगी,परन्तु किसी कारणवश कोई बहन इस मुहूर्त में राखी नहीं बांध तो सर्व प्रथम भगवान गणेश को रक्षा सूत्र बांधकर भाइयों राखी बंधी जा सकती है। वैसे तो उदय व्यापिनी सिद्धांत के अनुसार पूरे दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा सकेगा। 28 अगस्त को पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण भी पड़ रहा है, लेकिन यह भारत में दिखाई नहीं देगा।
इसलिए इसका रक्षाबंधन पर्व पर कोई प्रभाव नहीं माना जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार रक्षाबंधन के दिन स्नान के बाद सबसे पहले भगवान को रक्षा सूत्र अर्पित कर लक्ष्मी-नारायण की पूजा करनी चाहिए। इस दिन श्रावणी उपक्रम के तहत वैदिक ब्राह्मण यज्ञोपवीत भी बदलते हैं।



