( ज्ञान प्रकाश पाण्डेय )
हरिद्वार / भगवानपुर । पुलिस विभाग में कुछ अधिकारी अपनी कार्यशैली, अनुशासन और अपराध के खिलाफ सख्त रुख के कारण अलग पहचान बनाने में सफल होते हैं। इंस्पेक्टर रितेश शाह भी ऐसे ही पुलिस अधिकारियों में गिने जाते हैं, जिनकी कार्यशैली को लेकर क्षेत्र में चर्चा बनी रहती है। भगवानपुर में कार्यभार संभालने के बाद अपराध और नशे के खिलाफ उनकी सक्रियता ने उन्हें एक अलग पहचान दिलाई है।
रितेश शाह की कार्यशैली का सबसे प्रमुख पहलू अपराधियों के खिलाफ सख्ती के साथ-साथ आम लोगों की शिकायतों को गंभीरता से सुनना बताया जाता है। उनके कार्यकाल में पुलिस की प्राथमिकताओं में अपराध नियंत्रण, नशे के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ितों को न्याय दिलाने पर विशेष जोर दिखाई देता है।

नशे के खिलाफ सख्त रुख
क्षेत्र में नशे की समस्या को लेकर पुलिस की कार्रवाई हमेशा एक महत्वपूर्ण विषय रही है। रितेश शाह के नेतृत्व में नशे के कारोबार और इससे जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई को प्राथमिकता दिए जाने की बात सामने आती रही है। उनका जोर केवल कार्रवाई तक सीमित न रहकर नशे के नेटवर्क पर प्रभावी निगरानी बनाए रखने पर भी रहता है।
सिविल लाइन रुड़की में भी छोड़ी थी अलग छाप
भगवानपुर से पहले रुड़की सिविल लाइन में वरिष्ठ उप निरीक्षक के रूप में कार्य करते हुए भी रितेश शाह ने पुलिसिंग के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई थी। उनके उस कार्यकाल की कार्यशैली को भी विभागीय स्तर पर सराहनीय माना गया। यही अनुभव आगे उनकी पुलिसिंग में दिखाई देता है और उनके काम करने के तरीके में अपराधियों पर प्रभावी निगरानी तथा त्वरित कार्रवाई की झलक मिलती है।
‘सिफारिश नहीं, नियम के अनुसार काम’ की छवि
रितेश शाह को लेकर सबसे अधिक चर्चा उनकी उस कार्यशैली की होती है जिसमें वह पुलिस कार्रवाई को नियम और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ाने पर जोर देते हैं। उनके बारे में यह धारणा बनी है कि प्रभावशाली व्यक्ति हो या सामान्य नागरिक, पुलिस की कार्रवाई में कानून को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
इसी सख्त कार्यशैली के चलते उन्हें कई लोग ‘सिंघम’ की उपमा भी देते हैं। हालांकि किसी अधिकारी की असली पहचान उसके पदनाम से नहीं बल्कि उसके काम और जनता के प्रति व्यवहार से बनती है।
गरीब और पीड़ित लोगों की सुनवाई पर जोर
पुलिसिंग का एक महत्वपूर्ण पक्ष अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ पीड़ितों की सुनवाई भी है। रितेश शाह के बारे में यह बात कही जाती है कि थाने पहुंचने वाले फरियादियों की समस्याओं को सुनकर उनकी शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई कराने का प्रयास किया जाता है।
आम नागरिकों के साथ संवाद और उनकी समस्याओं को समझना पुलिस और जनता के बीच विश्वास कायम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही वजह है कि उनकी कार्यशैली को केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता।
मजबूत सूचना तंत्र से अपराधियों पर नजर
अपराध नियंत्रण में पुलिस का सूचना तंत्र बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। किसी अपराधी की गतिविधियों की जानकारी समय पर मिलना और उसके बाद कानून के दायरे में कार्रवाई करना पुलिस की सफलता का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। रितेश शाह की कार्यशैली में भी स्थानीय स्तर पर सूचनाओं और पुलिस नेटवर्क को सक्रिय रखने पर जोर दिखाई देता है।
उनकी छवि ऐसे अधिकारी की बनी है जो अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई में पीछे हटने के बजाय वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के अनुरूप अभियान को आगे बढ़ाने में विश्वास रखते हैं। यही कारण है कि विभागीय स्तर पर भी उनकी कार्यशैली को महत्वपूर्ण माना जाता है।
सख्ती के साथ संवेदनशीलता—यही है पुलिसिंग का संतुलन
रितेश शाह की पुलिसिंग की खासियत के तौर पर अपराधियों के खिलाफ सख्ती और पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता को सामने रखा जा सकता है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जहां आवश्यक हो वहां कठोर कार्रवाई और दूसरी ओर आम नागरिक की शिकायत को सम्मानपूर्वक सुनना—एक पुलिस अधिकारी के लिए यही संतुलन सबसे महत्वपूर्ण होता है।
भगवानपुर में उनकी तैनाती के दौरान उनकी कार्यशैली को लेकर बनी चर्चा यह संकेत देती है कि पुलिसिंग में सक्रियता, बेहतर सूचना तंत्र और जनता से संवाद का अपना अलग महत्व है। आने वाले समय में अपराध नियंत्रण और नशे के खिलाफ अभियान को किस तरह आगे बढ़ाया जाता है, यह उनकी कार्यशैली की वास्तविक कसौटी होगी।
कुल मिलाकर, इंस्पेक्टर रितेश शाह की पहचान एक ऐसे पुलिस अधिकारी के रूप में उभरती है जो कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर रुख रखते हैं, अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को प्राथमिकता देते हैं और पीड़ितों की सुनवाई को पुलिसिंग का अहम हिस्सा मानते हैं। उनकी यही कार्यशैली उन्हें अन्य अधिकारियों से अलग पहचान दिलाने में मदद कर रही है।



