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खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी,  बुंदेले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी। आखिर किसने किया पुष्प अर्पित और क्यों ? पढ़े  

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– हनुमान मंगलम परिवार और अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने बलिदान दिवस पर रानी लक्ष्मी बाई को किए पुष्प अर्पित।
( ब्यूरो ,न्यूज़ 1 हिन्दुस्तान )
गाजियाबाद। हनुमान मंगलमय परिवार ट्रस्ट और अखिल भारत  हिंदू महासभा ने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई पर  बलिदान दिवस पुष्प अर्पित किए। इस अवसर पर हनुमान मंगलमय परिवार ट्रस्ट के संस्थापक तथा अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता बीके शर्मा हनुमान ने श्रद्धा सुमन अर्पित कर  कहा की अंग्रेजों से युद्ध करते हुए 18 जून 1858 को झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने बलिदान दिया था। उन्होंने बताया की लक्ष्मी बाई दैवीय गुण संपन्न महान स्त्री थी। लक्ष्मी बाई जैसी देवी को पाकर भारत देश अपने भाग्य पर गर्व करता है। इटली की राज्यक्रांति में पराक्रम के अनेक उत्कृष्ट उदाहरण मिलते हैं। लेकिन झांसी की रानी लक्ष्मीबाई जैसा एक भी उदाहरण इटली के पास है इंग्लैंड के पास है और ना दुनिया के किसी दूसरे देश के पास है।

लक्ष्मी बाई का जन्म 19 नवंबर 1828 को वाराणसी में हुआ था। बचपन का उनका नाम मणिकर्णिका था, उन्हीं के नाम पर आज भी बनारस में मणिकर्णिका घाट है। उनका विवाह ग्वालियर राजघराने में हुआ था। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में रानी लक्ष्मीबाई का एक अलग स्थान है। सारा देश उन्हें एक महान योद्धा के रूप में याद करता है। अपने जीवन के बहुत छोटे समय में उन्होंने वह मुकाम हासिल किया जिसे बड़े से बड़े योद्धा भी हासिल करने में नाकाम हो जाते हैं। मात्र 25 वर्ष की आयु में पति और पुत्र को खोने के बाद भी उन्होंने अंग्रेजों को युद्ध के लिए ललकारा जो किसी महिला के लिए आसान काम नहीं था। यह वह समय था जब बड़े से बड़े राज्य में अंग्रेजों की खिलाफत करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे। रानी लक्ष्मीबाई ने मृत्यु को गले लगाया लेकिन अपने आत्मसम्मान अपने स्वाभिमान को नहीं छोड़ा। इस अवसर पर एमसी गॉड विनोद कुमार हरेंद्र कुमार आदि मौजूद थे। 

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