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उत्तराखण्ड में अब यौन हिंसा व एसिड अटैक की शिकार महिलाओं को मिलेगा मुआवजा। आखिर कैसे ? जाने 

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( ब्यूरो ,न्यूज़ 1 हिन्दुस्तान )
देहरादून।
राज्य कैबिनेट की बैठक में कई अहं निर्णय लिए गए हैं। उत्तराखंड में यौन अपराध या एसिड अटैक की शिकार महिलाओं व उनके आश्रितों को राहत के तौर पर मुआवजा मिलेगा। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार ने 2018 में योजना तैयार की थी। उत्तराखंड सरकार ने इस योजना को लागू कर दिया है। बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में उत्तराखंड यौन अपराध एवं अपराधों से पीड़ित व उत्तरजीवी महिलाओं के लिए प्रतिकर योजना को मंजूरी दे दी गई।


कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने बताया कि यौन अपराध, एसिड अटैक व अन्य अपराधों से पीड़ित महिलाओं को सरकार की ओर से मुआवजा राशि दी जाएगी। योजना के तहत मुआवजे के लिए एक निधि बनेगी। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मुआवजा निर्धारित करेंगे। उनके माध्यम से पीड़ित महिलाओं व आश्रितों को मुआवजा दिया जाएगा। कैबिनेट में 14 अहम प्रस्तावों पर चर्चा हुई, जिनमें से 13 को मंजूरी दे दी गई है। विधानसभा का सत्र 23 से 25 सितंबर तक देहरादून में होगा। प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी दी। कोविड फंड के लिए विधायकों की वेतन कटौती पर विवाद के बीच प्रदेश सरकार उत्तराखंड राज्य विधानसभा (सदस्यों की उपलब्धियां एवं पेंशन) संशोधन अध्यादेश 2020 लाएगी। कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। अध्यादेश के लागू होने से सभी विधायकों के वेतन, सचिवीय व निर्वाचन भत्तों से 30 फीसदी राशि एक अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2021 तक काटी जा सकेगी। जमरानी और सौंग बांध परियोजनाओं के लिए कैबिनेट ने पीआईयू गठित करने की मंजूरी दी। इसके तहत दोनों पीआईयू में 143 पद होंगे। जबकि 32 अन्य आउटसोर्स पदों को भी भरने पर हामी भरी गई। हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीशों व न्यायाधीशों का सेवक और मिनिस्टीरियल भत्तों में सात साल बाद करीब डेढ़ गुना बढ़ोतरी की गई है। मुख्य न्यायाधीश को अब 15-15 हजार के हिसाब से 30 हजार और न्यायाधीशों को 12.50 हजार के हिसाब से दोनों मदों में 25 हजार रुपये मंजूर किए गए हैं।

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जौनसार बावर के लोगों को वर्ग चार की भूमि पर कब्जे का मालिकाना हक, उत्तराखंड जौनसार बावर जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 1956 में संशोधन को मंजूरी दी गई है। एचएनबी गढ़वाल चिकित्सा शिक्षा विवि के कुलपति की आयुसीमा 65 साल से बढ़ाकर 70 वर्ष की। मौजूदा कुलपति को भी मिलेगा लाभ, लेकिन पुनर्नियुक्ति नहीं हो पाएगी। अनियमितता के दोषी लघु सिंचाई में जेई स्व. अनिल कुमार के मामले में वसूली नहीं होगी। जेई का निधन हो जाने के बाद अब वसूली की बकाया 4.08 लाख की राशि बट्टे खाते में जाएगी। विकास प्राधिकरण के तहत महायोजना विकास क्षेत्र की कृषि भूमि का भू परिवर्तन नहीं कराना होगा। फिर उत्तर प्रदेश जमींदारी भू विनाश अधिनियम (अध्यादेश) लाया जाएगा। चिकित्सा विभाग के नर्सिंग शिक्षक सेवा संवर्ग के कार्मिक (ट्यूटर, असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, प्रोफेसर, उप प्रधानाचार्य एवं प्रधानाचार्य) को चिकित्सा शिक्षा विभाग में शामिल करने को मंजूरी दी गई है। एम्स ऋषिकेश के नजदीक रोगी सहायता केंद्र स्थापित करने को भाऊराव देवरस न्यास, निरालानगर लखनऊ को 1.43 हेक्टेयर भूमि लीज पर दी जाएगी।  

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