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उत्तराखण्ड में धान के भुगतान मामले में सरकार के दावे हुए हवा- हवाई। आखिर कैसे ?  टैब कर जाने 

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#एमएसपी के चक्कर में किसानों पर बन आई !    #खराब आर्थिक स्थिति के चलते किसान नहीं कर पाता भंडारण !  #किसान को चुकाना है खाद,बीज और ऋण दाता का कर्ज़ |  #राजभवन से लगाई मोर्चा ने गुहार | 

( ब्यूरो ,न्यूज़ 1 हिन्दुस्तान )

विकासनगर।  जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि सरकार ने दावा किया था कि एक- आध महीने के भीतर किसानों के धान का भुगतान कर देंगे, लेकिन अधिकांश वास्तविक किसानों को आज तक धान का भुगतान नहीं किया गया, जिस कारण उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है |       नेगी ने कहा कि किसानों ने एमएसपी के तहत धान बेचकर एक तरह से अपनी आफत मोल ले ली है |सरकार को सोचना चाहिए कि प्रदेश के अधिकांश किसान फसल बोते समय ही खाद/बीज उधार लेकर फसल तैयार करता है तथा फसल कटते ही उसको ऋणदाता का कर्ज चुकाना होता है | महत्वपूर्ण तथ्य है कि अगर किसान संपन्न होता तो उसे अपनी उपज बेचने की क्या जरूरत थी ! वह उसका भंडारण कर कुछ समय पश्चात बेचकर मुनाफा कमा सकता था, लेकिन मजबूरी के चलते उसको अपनी उपज बेचने पड़ती है |                

नेगी ने कहा कि सरकार फिजूलखर्ची  करने को बाजार से ऋण उठा सकती है, लेकिन इन गरीब किसानों को देने के लिए सरकार के पास धन नहीं है | मोर्चा ने किसानों के भुगतान के मामले में  राजभवन को पत्र प्रेषित कर कार्रवाई की मांग की है | पत्रकार वार्ता में -विजय राम शर्मा, दिलबाग सिंह, सुशील भारद्वाज आदि थे |

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