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कोरोना पर भारी आस्था , धूमधाम से मना देवभूमि में छठ पूजा,नहीं हुआ आदेशों का पालन। आखिर क्यों ? टैब कर जाने 

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* पुलिस तो मौजूद पर भीड़ को गंगा घाट पर जाने से नहीं रोक सकी।

( ज्ञान प्रकाश पाण्डेय )

हरिद्वार। सूर्य देव की आराधना के महापर्व छठ पूजा के लिए हरिद्वार के गंगा घाटों पर लोग छठ मना रहे है। छठ के महापर्व पर गंगा घाटों पर रोक के बावजूद भी  श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली  और ङूबते हुए सूर्य को अर्ध्य देने के लिए देर शाम तक श्रद्धालु गंगा घाटों पर जुटे रहे।  छठ पूजा सूर्य की आराधना का महापर्व माना जाता है और संतान प्राप्ति और पति की लंबी आयु के साथ परिवार में सुख शांति की कामना के लिए इस पर्व को मनाया जाता है। 

 आपको बता दे की  उत्तर भारत में मनाया जाने वाला बड़ा पर्व छठ पूजा भी कोरोना के डर के चलते प्रतिबंधों के साथ मनाया जाना था । धर्म नगरी हरिद्वार में जिला प्रशासन के द्वारा छठ पूजा मनाने के लिए गाइडलाइन जारी की गई थीं । जिसके तहत हरकी पैड़ी समेत अन्य सार्वजनिक गंगा घाटों पर छठ पूजा और सूर्य की आराधना पर रोक लगाई गई थी । जिला प्रशासन की ओर से जारी किए गए दिशा-निर्देशों में  सभी श्रद्धालु अपने घरों में रहकर कोरोना से बचाव करते हुए छठ का पर्व मनाने को कहा गया था  । लेकिन कोरोना पर आस्था भारी पड़ी  और लोगो ने धूम धाम से छठ  पर्व पर  डूबते  सूर्ये को अर्ग दिया और छट  मैया से कामना  की यह कोरोना महामारी जल्द ही खत्म हो. कल सुबह उगते सूर्य को जल देकर व्रत रखने वाली महिलाये अपन व्रत खोलेगी। 

चार दिन तक चलने वाला छठ महापर्व देवभूमि उत्तराखंड में धूमधाम मना। प्रशासन के गंगा घाटों पर रोक के वावजूद श्रद्धालुओ ने किया गंगा घाटों पर छठ पर्व। छठ पर्व का आज तीसरा दिन है। तीसरे दिन शाम को लोगो ने डूबता सूर्य को अर्घ दिया। जिसे संध्या अर्घ्य भी कहते है। उगते सूर्य को अर्घ्य देने की रीति तो कई व्रतों और त्योहारों में है लेकिन डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा केवल छठ में ही है।  अर्घ्य देने से पहले बांस की टोकरी को फलों, ठेकुआ, चावल के लड्डू और पूजा के सामान से सजाया जाता है।  सूर्यास्त से कुछ समय पहले सूर्य देव की पूजा होती है फिर डूबते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देकर पांच बार परिक्रमा की जाती है। 

क्‍यों दिया जाता है डूबते सूर्य को अर्घ्‍य?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सायंकाल में सूर्य अपनी पत्नी प्रत्यूषा के साथ रहते हैं।  इसलिए छठ पूजा में शाम के समय सूर्य की अंतिम किरण प्रत्यूषा को अर्घ्य देकर उनकी उपासना की जाती है।  कहा जाता है कि इससे व्रत रखने वाली महिलाओं को दोहरा लाभ मिलता है।  जो लोग डूबते सूर्य की उपासना करते हैं, उन्हें उगते सूर्य की भी उपासना जरूर करनी चाहिए। 

ज्योतिषियों का कहना है कि ढलते सूर्य को अर्घ्य देकर कई मुसीबतों से छुटकारा पाया जा सकता है।  इसके अलावा इससे सेहत से जुड़ी भी कई समस्याएं दूर होती हैं।  वैज्ञानिक दृष्टिकोण के मुताबिक ढलते सूर्य को अर्घ्य देने से आंखों की रोशनी बढ़ती है। 

वही प्रशासन द्वारा गंगा घाटों पर छठ पूजा पर रोक लगाए जाने के बावजूद भी आदेश का कहीं पालन नहीं हुआ। समस्त गंगा घाटों पर भीड़ जमा।पुलिस तो मौजूद पर भीड़ को गंगा घाट पर जाने से नहीं रोक सकी।

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