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उत्तराखण्ड में बेरोजगारों पर राजनीती हुई तेज़ …..,हरदा के परिक्रमा यात्रा पर आखिर भाजपा ने क्यों कहा कि आभार यात्रा निकाले ? टैब कर पढ़े

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 ( ब्यूरो ,न्यूज़ 1 हिन्दुस्तान )

देहरादून। उत्तराखण्ड के आगामी 2022 विधानसभा चुनाव के डेढ़ साल पहले ही राज्य में चुनावी हलचले अभी से तेज़ हो चली है। अचानक राज्य के बेरोज़गार सियासी दलों के प्रमुख एजेंडे में शामिल हो गए हैं।  पिछले तीन साल से फॉरेस्ट गार्ड भर्ती पर चुप्पी साधे बैठी कांग्रेस की युवा विंग ने इस भर्ती परीक्षा का परिणाम शीघ्र जारी करने की मांग को लेकर 13 अक्टूबर को सचिवालय कूच किया, तो कांग्रेस के सीनियर लीडर भी मार्च में शामिल हो लिए।  अब पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सिडकुल में परिक्रमा यात्रा निकालने का ऐलान किया है तो बीजेपी का कहना है कि उन्हें धन्यवाद यात्रा निकालनी चाहिए। दो दिन पहले निकले यूथ कांग्रेस के सचिवालय कूच में फॉरेस्ट गार्ड का एग्ज़ाम देने वाले बेरोज़गार भी शामिल थे।  मार्च के दौरान युवाओं में गुस्सा और जोश दिखा तो राजनीति के माहिर खिलाड़ी कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को नब्ज़ पहचानने में देर नहीं लगी। 
हरीश रावत ने कहा कि यह अभियान अब यहां नहीं रुकेगा।  उन्होंने मौके पर ही ऐलान कर दिया कि रिक्त पदों पर स्थानीय बेरोजगारों को रोज़गार देने की मांग को लेकर वह 17 अक्टूबर को सिडकुल हरिद्वार में परिक्रमा यात्रा निकालेंगे।  हरीश रावत का कहना है कि सरकार सिडकुल में रिक्त पड़े पदों पर भर्तियों के लिए उद्यमियों से एमओयू साइन करे। 


राजनीति न करें हरीश रावत
हरीश रावत के ऐलान के बाद बीजेपी में हलचल तेज हो गई है कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे ने कहा कि हरीश रावत सीनियर लीडर हैं।  सभी जानते हैं कि कोविड-19 की वजह से उद्योग से लेकर हर क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।  ऐसे में हरीश रावत को राजनीति नहीं करनी चाहिए। 
वही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने पलटवार करते हुए कहा हरीश रावत को परिक्रमा यात्रा नहीं बल्कि त्रिवेंद्र सिंह रावत और भाजपा सरकार के प्रति आभार यात्रा निकालनी चाहिए।  उन्होंने दावा किया कि पिछले साढ़े तीन साल में सरकारी, सार्वजनिक व निजी क्षेत्र में लाखों रोज़गार पैदा हुए और विभिन्न क्षेत्रों में सात लाख से अधिक को रोज़गार उपलब्ध कराया गया।  बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने बाकायदा भाजपा सरकार के कार्यकाल में रोज़गार के लिए हुए कामों की लिस्ट भी जारी की। अप्रैल 2017 से सितम्बर 2020 तक विभिन्न विभागों के अंतर्गत कुल 7 लाख 12 हज़ार से अधिक लोगों को रोज़गार प्रदान किया गया। 
इनमें से नियमित रोज़गार लगभग 16 हज़ार, आउटसोर्स/अनुबंधात्मक रोज़गार लगभग 1 लाख 15 हज़ार और स्वयं उद्यमिता/प्राईवेट निवेश से प्रदान/निर्माणाधीन परियोजनाओं से रोज़गार लगभग 5 लाख 80 हज़ार है। 
उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा की गई भर्तियों की दृष्टि से कांग्रेस शासन में वर्ष 2014 से 2017 तक कुल 8 परीक्षाएं आयेाजित की गईं जिनमें 801 पदों पर चयन पूर्ण किया गया। दूसरी ओर वर्ष 2017 से 2020 तक कुल 59 परीक्षाएं आयोजित की गईं जिनमें 6000 पदों पर चयन पूर्ण किया गया। 
वर्तमान में उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में 7200 पदों पर अधियाचन/भर्ती प्रक्रिया गतिमान है.प्रदेश में चिकित्सकों की संख्या कांग्रेस शासन काल की अपेक्षा ढाई गुना हो चुकी है।  शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है।  लोक सेवा आयोग ने गत डेढ़ वर्ष में साढ़े तीन हज़ार पदों पर चयन पूरा किया है।  इसके अलावा मनरेगा में प्रति वर्ष 6 लाख लोगों को रोज़गार दिया जाता है।

  माफ़ी मांगें हरीश रावत

कोविड के दौरान इसमें अतिरिक्त रोज़गार दिया गया है।  पिछले वर्ष की तुलना में 84 हज़ार अतिरिक्त परिवारों (2 लाख अतिरिक्त श्रमिकों) को रोज़गार दिया गया है। पिछले वर्ष की तुलना में 170 करोड़ रुपये अतिरिक्त व्यय किए गए हैं।  आगामी तीन माह में कैम्पा के अंतर्गत 40 हज़ार लोगों को रोज़गार उपलब्ध कराने की कार्ययोजना है। 
बंशीधर भगत ने  कहा कि हरीश रावत में नैतिकता है तो अब उन्हें बेरोज़गारों की उपेक्षा के लिए जनता से माफ़ी मांगनी चाहिए और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और उनके नेतृत्व में प्रदेश की भाजपा सरकार को धन्यवाद देते हुए आभार यात्रा निकालनी चाहिए। इससे उनका कुछ प्रायश्चित हो सकेगा। 

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